Bihar: भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्रों ने एक कमाल का आविष्कार किया है। छात्रों ने नैनोसिलिका और केवलार फाइबर का इस्तेमाल करके एक नैनोकम्पोजिट बुलेटप्रूफ आर्मर तैयार किया है। इस प्रोजेक्
Bihar: भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्रों ने एक कमाल का आविष्कार किया है। छात्रों ने नैनोसिलिका और केवलार फाइबर का इस्तेमाल करके एक नैनोकम्पोजिट बुलेटप्रूफ आर्मर तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट का मकसद भारतीय सेना और सुरक्षा बलों की सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत बनाना है। शुरुआती जांच में यह काफी असरदार रहा है।
इस बुलेटप्रूफ आर्मर को किसने और कैसे बनाया?
इस प्रोजेक्ट को मैकेनिकल इंजीनियरिंग के आखिरी साल के छात्र विनीत प्रकाश, मुरारी भारद्वाज, अंजलि कुमारी और सूरज कुमार ने मिलकर तैयार किया है। इन छात्रों को प्रोफेसर जनमेजय कुमार और विभागाध्यक्ष डॉ. शिव रंजन कुमार ने गाइड किया। इस आर्मर को बनाने में नैनोसिलिका और केवलार फाइबर की छह परतों का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे काफी मजबूत बनाता है।
आगे क्या होगा और इसकी टेस्टिंग कहां होगी?
शुरुआती परीक्षणों में इस आर्मर की मजबूती और प्रभाव प्रतिरोध (impact resistance) बहुत अच्छा पाया गया। अब इसे असली सुरक्षा मानकों पर परखने के लिए तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में स्थित आयुध निर्माणी मेदक (Ordnance Factory Medak) भेजा जाएगा। वहां इसका बैलिस्टिक टेस्ट होगा जिससे पता चलेगा कि यह असल गोलियों को रोकने में कितना सक्षम है।
क्या इस तकनीक का पेटेंट कराया जाएगा?
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) आर. एम. तुगनायत ने इसे शोध के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि बताया है। विभागाध्यक्ष डॉ. शिव रंजन कुमार के मुताबिक, इस तकनीक के पेटेंट की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अगर यह सफल रहता है, तो भविष्य में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण में यह तकनीक बहुत काम आएगी और सैनिकों की जान बचाने में मददगार होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने बुलेटप्रूफ आर्मर बनाने में किन चीजों का इस्तेमाल किया?
छात्रों ने इस नैनोकम्पोजिट बुलेटप्रूफ आर्मर को बनाने के लिए नैनोसिलिका और केवलार फाइबर की छह परतों का उपयोग किया है।
इस आर्मर का असली परीक्षण (Ballistic Test) कहां किया जाएगा?
इस सामग्री का बैलिस्टिक परीक्षण तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में स्थित आयुध निर्माणी मेदक (Ordnance Factory Medak) में किया जाएगा।