Bhagalpur में पारंपरिक लोक नाट्य ‘डोमकच’ का मंचन, लोक गीतों पर झूमे लोग
Bhagalpur: शहर के ऐतिहासिक चंपानगर स्थित ज्योति कला केंद्र में लोक संस्कृति और पारंपरिक लोकगीतों का एक शानदार संगम देखने को मिला। यहां प्रसिद्ध रंगकर्मी Rajesh Kumar झा के निर्देशन में पारंपरिक लोक नाट्य ‘डोमकचR
Bhagalpur: शहर के ऐतिहासिक चंपानगर स्थित ज्योति कला केंद्र में लोक संस्कृति और पारंपरिक लोकगीतों का एक शानदार संगम देखने को मिला। यहां प्रसिद्ध रंगकर्मी Rajesh Kumar झा के निर्देशन में पारंपरिक लोक नाट्य ‘डोमकच’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। इस पूरी प्रस्तुति में Sangeeta झा ने सह-निर्देशक की भूमिका निभाई और दर्शकों को बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।
‘डोमकच’ मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के साथ-साथ नेपाल के मधेश प्रदेश में प्रचलित एक लोक नृत्य है। बिहार में यह मिथिला और भोजपुर क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय है। आमतौर पर यह नृत्य विवाह समारोहों के दौरान दूल्हा और दुल्हन के परिवार की महिलाओं और पुरुषों द्वारा किया जाता है। इसमें कलाकार एक-दूसरे का हाथ पकड़कर अर्ध-वृत्त बनाते हैं और व्यंग्य व आनंद से भरे गीत गाते हैं।
यह परंपरा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा सामाजिक महत्व भी है। डोमकच के जरिए महिलाएं अपने मन की कुंठा को बाहर निकालती हैं, जिससे उनमें नया उत्साह और आत्मविश्वास आता है। साथ ही, इस माध्यम से पुरानी पीढ़ी आने वाली पीढ़ी को दांपत्य जीवन जीने के तरीके और संस्कार सिखाती है। यह नृत्य कार्तिक मास में देवउठनी के बाद शुरू होता है और आषाढ़ में रथ यात्रा तक चलता है।
ज्योति कला केंद्र में हुए इस आयोजन ने लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया। गौरतलब है कि यह केंद्र सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, जहां पूर्व में मूर्तिकला कार्यशाला जैसी प्रदर्शनी भी आयोजित की गई थी। आने वाले समय में 20 से 22 दिसंबर 2025 तक यहां ‘भागलपुर रंग महोत्सव 2025’ का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें लोक नृत्य, शास्त्रीय नृत्य और नुक्कड़ नाटक जैसे कई कार्यक्रम शामिल होंगे।