Bhagalpur के बरारी रिवर फ्रंट पर डॉल्फिन की अठखेलियां, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार बना रही बड़ी योजना
Bhagalpur: शहर की भीड़भाड़ और सीमेंट के जंगलों के बीच अगर सुकून की तलाश है, तो बरारी रिवर फ्रंट और सीढ़ी घाट एक बेहतरीन जगह है। यहां डूबते सूरज का नजारा और गंगा नदी में डॉल्फिन की अठखेलियां लोगों को प्रकृति के करीब ले जा
Bhagalpur: शहर की भीड़भाड़ और सीमेंट के जंगलों के बीच अगर सुकून की तलाश है, तो बरारी रिवर फ्रंट और सीढ़ी घाट एक बेहतरीन जगह है। यहां डूबते सूरज का नजारा और गंगा नदी में डॉल्फिन की अठखेलियां लोगों को प्रकृति के करीब ले जाती हैं। अब सरकार इस इलाके को एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी में है ताकि स्थानीय लोगों और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड बरारी घाट पर 162.68 करोड़ रुपये की लागत से रिवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का लगभग 85% काम पूरा हो चुका है। योजना के मुताबिक यहां फूड कियोस्क, वेंडिंग स्टॉल, कैफेटेरिया, पार्किंग, स्ट्रीट लाइटिंग और सीसीटीवी जैसे आधुनिक इंतजाम होंगे। साथ ही, पर्यटकों के लिए एक डॉल्फिन संरक्षण केंद्र और लेजर व वाटर लाइट शो की सुविधा भी जोड़ी जाएगी।
पर्यटन को और बेहतर बनाने के लिए जल शक्ति मंत्रालय की ‘अर्थ गंगा ट्रेल’ परियोजना के तहत भागलपुर को प्रमुख पर्यटन स्थल बनाया जा रहा है। इसमें विक्रमशिला विश्वविद्यालय, बटेश्वर स्थान, बूढ़ानाथ मंदिर और बरारी सीढ़ी घाट जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही भागलपुरी सिल्क और मंजूषा कला को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर यह है कि करीब 20 साल बाद संकटग्रस्त इंडियन स्किमर पक्षी विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य में वापस लौटा है। यह गंगा नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य में सुधार का संकेत है। डॉल्फिन देखने के लिए अक्टूबर से जून का समय सबसे अच्छा माना जाता है। बरारी पुल घाट और मानिक सरकार घाट जैसे स्थानों पर इन्हें आसानी से देखा जा सकता है।
विक्रमशिला सेतु मार्ग बाधित होने के बाद प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए बरारी और महादेवपुर घाट पर विशेष इंतजाम किए हैं। यहां ‘जीविका दीदी की रसोई’ शुरू की गई है, जहां 50 रुपये में भरपेट भोजन मिलता है। यात्रियों के लिए शौचालय, पेयजल, चिकित्सा शिविर और पुलिस निगरानी की व्यवस्था की गई है। साथ ही किसानों के लिए मुफ्त नाव सेवा और क्रूज का परिचालन भी शुरू हुआ है।
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। पिछली बाढ़ के कारण रिवर फ्रंट पर गाद और मिट्टी जमा हो गई है, जिससे सीढ़ियां दब गई हैं। ड्रेजिंग न होने की वजह से नदी शहर के किनारे से नहीं बह रही है, जिससे स्नान और स्थानीय व्यापार पर असर पड़ा है। प्रशासन और संबंधित विभाग इन समस्याओं को दूर करने और मानसून से पहले सफाई करने की योजना पर काम कर रहे हैं।