Bhagalpur में अगस्त क्रांति का इतिहास, 1142 लोग गए थे जेल और 250 ने दी शहादत

Bhagalpur: भारत छोड़ो आंदोलन यानी अगस्त क्रांति के दौरान भागलपुर के लोगों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जबरदस्त संघर्ष किया था। बिहार सरकार के अभिलेखागार के आंकड़ों के मुताबिक, इस आंदोलन के समय जिले के 1142 लोगों को गिरफ्तार

Bhagalpur: भारत छोड़ो आंदोलन यानी अगस्त क्रांति के दौरान भागलपुर के लोगों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जबरदस्त संघर्ष किया था। बिहार सरकार के अभिलेखागार के आंकड़ों के मुताबिक, इस आंदोलन के समय जिले के 1142 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जिनमें से 463 क्रांतिकारियों को सजा सुनाई गई थी।

आंदोलन के दौरान भागलपुर में भारी हिंसा और संघर्ष देखने को मिला। सरकारी भवनों और थानों पर तिरंगा फहराने की कोशिश में अंग्रेजी सेना और पुलिस की गोलीबारी हुई, जिसमें लगभग 250 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इसके अलावा तीन स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई और आंदोलनकारियों ने जिले के 20 थानों पर हमला किया था। जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर तिलकपुर के सियाराम सिंह के नेतृत्व में ‘सियाराम दल’ का गठन हुआ था, जिसने समानांतर सरकारें बनाईं और ब्रिटिश अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती पेश किया।

इस आंदोलन की शुरुआत 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के आह्वान पर हुई थी। इससे पहले 5 अगस्त को बंबई में भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया गया था और 7-8 अगस्त को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने इसे मंजूरी दी थी, जहां गांधी जी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया था। भागलपुर और बांका के युवाओं, छात्रों और महिलाओं ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाओं ने जुलूस निकाले और घायल आंदोलनकारियों की मदद की।

वर्तमान में 7 से 9 अगस्त 2026 तक भागलपुर में एक तीन दिवसीय राष्ट्रीय समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम महात्मा गांधी के इस क्षेत्र में पहले आगमन के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित है, ताकि गांधीवादी सिद्धांतों पर चर्चा की जा सके।