Karnataka: मानसून आने से पहले बेंगलुरु और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। हाल ही में हुई बारिश से हुए नुकसान को देखते हुए अब स्पेशल डिजास्टर रिस्पांस टीमें बनाई जा रही हैं। बेंगलुरु में सैकड़ों पेड़ ग
Karnataka: मानसून आने से पहले बेंगलुरु और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। हाल ही में हुई बारिश से हुए नुकसान को देखते हुए अब स्पेशल डिजास्टर रिस्पांस टीमें बनाई जा रही हैं। बेंगलुरु में सैकड़ों पेड़ गिरने और टहनियां टूटने से काफी तबाही हुई थी, जिसे देखते हुए अब पहले से तैयारी की जा रही है ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।
बेंगलुरु में क्या खास तैयारी की गई है?
Greater Bengaluru Authority (GBA) के चीफ कमिश्नर M. Maheshwar Rao ने पांचों नगर निगमों को निर्देश दिया है कि वे आपातकालीन प्रणालियों को पूरी तरह तैयार रखें। शहर में 25 रैपिड रिस्पांस टीमें, 30 ट्री कैनोपी मैनेजमेंट टीमें, 11 नाइट टीमें और 18 क्रेन टीमें तैनात की जा रही हैं। हर टीम में 8 लोग होंगे जो जरूरत पड़ने पर तुरंत मौके पर पहुंचेंगे। इसके अलावा, मलबे को हटाने के लिए 13 अस्थायी टिम्बर डिपो भी बनाए गए हैं।
दिल्ली और अन्य राज्यों में क्या कदम उठाए गए?
दिल्ली के मेयर प्रवेष वाही ने नगर निगम के अधिकारियों को सफाई व्यवस्था मजबूत करने और विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने को कहा है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह ने एक हाई-लेवल मीटिंग की, जिसमें ‘जीरो कैजुअल्टी’ यानी शून्य मृत्यु दर का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए NDMA, NDRF और IMD जैसी संस्थाओं को बेहतर समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है। केरल में भी DM Act 2005 के तहत राहत शिविरों और कटाव रोकने के लिए फंड जारी किया गया है।
अधिकारियों के लिए क्या सख्त नियम लागू हुए?
प्रशासन ने अब अधिकारियों की जवाबदेही तय की है। बेंगलुरु में खतरनाक इमारतों और दीवारों को हटाने की जिम्मेदारी इंजीनियरों को दी गई है, और किसी भी हादसे की स्थिति में उन्हें जिम्मेदार माना जाएगा। साथ ही, DM Act 2005 का हवाला देते हुए जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मानसून के दौरान उनके मोबाइल फोन हर समय चालू रहने चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनसे संपर्क किया जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बेंगलुरु में बारिश से कितना नुकसान हुआ था?
हालिया बारिश की वजह से बेंगलुरु में 515 पेड़ जड़ से उखड़ गए थे और 1,500 से ज्यादा टहनियां टूट गई थीं, जिससे काफी नुकसान हुआ था।
केंद्र सरकार का मानसून को लेकर क्या लक्ष्य है?
गृह मंत्री अमित शाह ने आपदा प्रबंधन के दौरान ‘जीरो कैजुअल्टी’ (शून्य मृत्यु दर) का लक्ष्य रखा है और इसके लिए AI जैसी आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया है।