UP: बांदा की चकबंदी में भ्रष्टाचार के खिलाफ लखनऊ पहुंचे किसान, आयुक्त कार्यालय का किया घेराव
UP/Banda: बांदा जिले में चकबंदी प्रक्रिया में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों ने अब तूल पकड़ लिया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान लखनऊ पहुंचे और चकबंदी आयुक्त कार्यालय का घेराव किया। किसानों ने नारेबाजी करते हुए अपनी
UP/Banda: बांदा जिले में चकबंदी प्रक्रिया में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों ने अब तूल पकड़ लिया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान लखनऊ पहुंचे और चकबंदी आयुक्त कार्यालय का घेराव किया। किसानों ने नारेबाजी करते हुए अपनी समस्याओं को शासन के सामने रखा और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल के नेतृत्व में किसानों ने आयुक्त को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि किसानों को न्याय मिल सके। बता दें कि यह विरोध प्रदर्शन काफी समय से चल रहा है। इससे पहले 7 जुलाई को शालिनी सिंह पटेल के नेतृत्व में अमलीकौर और लोहरा गांवों के किसानों ने चित्रकूट धाम मंडल के मंडलायुक्त को भी ज्ञापन सौंपा था।
किसानों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली धीमी है और इसमें अनियमितताएं हो रही हैं। 4 जुलाई को लोहरा और अमलीकौर गांवों के छह किसानों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया था। सिटी मजिस्ट्रेट संदीप केला ने उन्हें अनशन समाप्त करने की सलाह दी थी, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे। 29 जून को भी किसानों ने जिला मजिस्ट्रेट के साथ वार्ता की थी, लेकिन बात नहीं बनी, जिसके बाद उन्होंने मंडलायुक्त कार्यालय में प्रदर्शन किया था।
सरकारी नियमों की बात करें तो उत्तर प्रदेश सरकार ने 28 अगस्त 2025 से नए नियम लागू किए हैं। अब किसी भी राजस्व गांव में चकबंदी तभी होगी जब वहां के कम से कम 75 प्रतिशत किसान अपनी लिखित सहमति देंगे। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम 1953 के तहत भू-अभिलेखों के शुद्धिकरण और चक निर्माण की प्रक्रिया चलती है।
इस मामले में पहले भी सख्त कदम उठाए गए हैं। 14 जून 2024 को चकबंदी आयुक्त G.S. Naveen ने बांदा और मीरजापुर के कुछ अधिकारियों को लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए थे। फिलहाल, बांदा के लोहरा, अमलीकौर, सिलेहटा, बहिंगा, खप्टिहा खुर्द और महबरा गांवों के किसान इस प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।