Australia में बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन हुआ और सख्त, नियम तोड़ने वाली टेक कंपनियों पर लगेगा 99 मिलियन डॉलर का जुर्माना

World: ऑस्ट्रेलिया सरकार ने बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए अपने कड़े कानून को और भी सख्त कर दिया है। अब उन टेक कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा जो इन नियमों का पालन नहीं करेंगी। सरकार का यह कदम इसलिए उठाया

World: ऑस्ट्रेलिया सरकार ने बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए अपने कड़े कानून को और भी सख्त कर दिया है। अब उन टेक कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा जो इन नियमों का पालन नहीं करेंगी। सरकार का यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि पुराने नियमों के बावजूद किशोरों में सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम नहीं हुआ था।

शनिवार, 27 जून 2026 को हुई घोषणा के मुताबिक, अगर कोई कंपनी नियमों का बार-बार उल्लंघन करती है, तो उस पर लगने वाला अधिकतम जुर्माना अब 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से बढ़ाकर 99 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 68 मिलियन अमेरिकी डॉलर) कर दिया गया है। इसके साथ ही इंटरनेट रेगुलेटर eSafety Commissioner को अब और ज्यादा ताकत दी गई है। अब यह अधिकारी कंपनियों से सबूत मांग सकते हैं कि उन्होंने 16 साल से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं।

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि बड़ी टेक कंपनियां कानून मानने में ढिलाई बरत रही हैं और अभी भी बहुत सारे बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं कम्युनिकेशंस मिनिस्टर अनिका वेल्स ने कहा कि कंपनियां सिर्फ उतना ही काम कर रही हैं जिससे वे जुर्माने से बच सकें, इसलिए रेगुलेटर को और शक्तिशाली बनाना जरूरी था।

इस कानून के असर को लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूकैसल की एक स्टडी में सामने आया कि बैन लागू होने के तीन महीने बाद भी 12 से 15 साल के करीब 80 से 85 प्रतिशत बच्चे सोशल मीडिया चला रहे थे। हालांकि, सरकार का दावा है कि अब तक 50 लाख से ज्यादा ऐसे अकाउंट हटाए या बंद किए जा चुके हैं जो 16 साल से कम उम्र के बच्चों के थे।

इस कानून के दायरे में Meta (Facebook और Instagram), Google (YouTube), Snap (Snapchat), TikTok और X (Twitter) जैसी बड़ी कंपनियां आती हैं। दूसरी तरफ, Reddit ने इस कानून को अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन बताते हुए ऑस्ट्रेलिया की हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसे सरकार अदालत में defend करेगी। यह नया कानून संघीय संसद के विंटर ब्रेक से पहले लागू होने की उम्मीद है।