Delhi में अरविंद केजरीवाल का पुराना बंगला बनेगा स्टेट गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर, सरकार ने तैयार की योजना
Delhi: नॉर्थ दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में स्थित अरविंद केजरीवाल का पुराना सरकारी बंगला अब दिल्ली का स्टेट गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर बनेगा। 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित इस बंगले को दिल्ली सरकार इस नए रूप में विकसित करने जा
Delhi: नॉर्थ दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में स्थित अरविंद केजरीवाल का पुराना सरकारी बंगला अब दिल्ली का स्टेट गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर बनेगा। 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित इस बंगले को दिल्ली सरकार इस नए रूप में विकसित करने जा रही है। अक्टूबर 2024 में केजरीवाल के यहां से जाने के बाद से यह बंगला खाली पड़ा है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और वरिष्ठ अधिकारियों ने एक हाई-लेवल मीटिंग में इस प्रस्ताव पर चर्चा की है। दिल्ली सरकार के पास फिलहाल अपना कोई स्टेट गेस्ट हाउस नहीं है, इसलिए इस बंगले को मेहमाननवाजी और सरकारी कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। PWD मंत्री परवेश वर्मा ने 6 जुलाई 2026 को बताया कि यहां एक ‘रंग महल’ भी बनाया जाएगा, जहां सरकारी मेहमानों और बड़े अधिकारियों के ठहरने की व्यवस्था होगी।
इस सेंटर में सिर्फ कमरे ही नहीं, बल्कि एक पब्लिक कैफेटेरिया, पार्किंग और वेटिंग हॉल जैसी सुविधाएं भी होंगी। बाहरी राज्यों से आने वाले मंत्रियों और अधिकारियों के लिए यहां कमरे फीस लेकर उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही, इस परिसर का इस्तेमाल सांस्कृतिक कार्यक्रमों और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों की मीटिंग के लिए भी होगा।
इस बंगले के नवीनीकरण को लेकर पहले काफी विवाद हुआ था, जिसे बीजेपी ने ‘शीश महल’ का नाम दिया था। इसके बाद फरवरी 2025 में CPWD की रिपोर्ट के आधार पर नवीनीकरण में हुई अनियमितताओं और खर्चों की जांच के आदेश दिए गए थे। अब सरकार का कहना है कि जनता के पैसे का सही इस्तेमाल करने के लिए इस आलीशान बंगले को सार्वजनिक उपयोग में लाया जा रहा है, इसलिए इसमें कम से कम तोड़-फोड़ की जाएगी।
PWD को बंगले की मौजूदा हालत की पूरी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। हालांकि, कैबिनेट मीटिंग में EV पॉलिसी पर ध्यान देने की वजह से इस प्रस्ताव पर चर्चा टल गई थी, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक इसे जल्द ही अंतिम मंजूरी मिल जाएगी। नियमों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास का हक नहीं होता है, जिसे केजरीवाल के इस्तीफे के बाद स्पष्ट किया गया था।