Delhi: पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। Excise Policy केस में उन्हें ट्रायल कोर्ट से राहत मिली थी, लेकिन अब CBI ने उसे चुनौती दी है। इस बीच केजरीवाल ने जज के खिलाफ 
Delhi: पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। Excise Policy केस में उन्हें ट्रायल कोर्ट से राहत मिली थी, लेकिन अब CBI ने उसे चुनौती दी है। इस बीच केजरीवाल ने जज के खिलाफ ‘हितों के टकराव’ का मुद्दा उठाया है, जिससे कोर्ट में गहमागहमी बढ़ गई है।
Arvind Kejriwal ने जज के हटने की मांग क्यों की?
Arvind Kejriwal ने 14 अप्रैल को एक हलफनामा दाखिल किया। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि Justice Swarana Kanta Sharma के बच्चे केंद्र सरकार के वकील हैं और उन्हें Solicitor General के जरिए काम मिलता है। चूंकि Solicitor General ही इस केस में CBI का पक्ष रख रहे हैं, इसलिए केजरीवाल का कहना है कि यह हितों का टकराव है और जज को इस केस से अलग हो जाना चाहिए।
CBI ने केजरीवाल के आरोपों पर क्या कहा?
CBI ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। एजेंसी का कहना है कि केजरीवाल सिर्फ न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। CBI के मुताबिक, अगर ऐसे आरोपों को माना गया तो भविष्य में किसी भी ऐसे जज को केस नहीं सुनने दिया जाएगा जिसके रिश्तेदार सरकारी पैनल में हों, जो एक खतरनाक मिसाल होगी।
कोर्ट की अब तक की कार्रवाई और ताजा स्थिति
- 27 फरवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को केस से बरी कर दिया था।
- 9 मार्च 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने CBI की याचिका पर नोटिस जारी किया।
- 13 अप्रैल 2026 को जज के हटने (recusal) की अर्जी पर कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
- 16 अप्रैल 2026 को केजरीवाल वर्चुअली पेश हुए और उनका अतिरिक्त हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया गया, लेकिन कोर्ट ने कार्यवाही दोबारा शुरू करने से मना कर दिया।
इसके अलावा, दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया से कोर्ट की कार्यवाही के अनधिकृत वीडियो हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन है।