Arnab Goswami केस: बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा- कानूनी लड़ाई को ‘प्रॉक्सी वॉर’ न बनाएं, 2020 की गिरफ्तारी पर चल रही सुनवाई
Maharashtra: रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ Arnab Goswami की 2020 की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस Milind Jadhav ने कहा कि 2020 से अब तक काफी समय बीत चुका है और इस कानूनी
Maharashtra: रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ Arnab Goswami की 2020 की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस Milind Jadhav ने कहा कि 2020 से अब तक काफी समय बीत चुका है और इस कानूनी प्रक्रिया को ‘प्रॉक्सी वॉर’ यानी छद्म युद्ध नहीं बनना चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को मामले को अलग नजरिए से देखने की सलाह दी है।
यह पूरा मामला इंटीरियर डिजाइनर Anvay Naik की आत्महत्या से जुड़ा है। Arnab Goswami ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस जाधव ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब एक मजिस्ट्रेट पहले ही पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर चुके थे, तो राज्य सरकार के पास 2018 के इस मामले को दोबारा खोलने का क्या अधिकार था। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र के स्तंभों के बीच एक जोड़ने वाली शक्ति के रूप में काम करती है।
अदालत में सरकारी वकील Shishir Hiray ने बताया कि इस केस में पहले क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई थी, लेकिन साल 2020 में इसे फिर से खोल दिया गया। वहीं Goswami के वकील Niranjan Mundargi ने दलील दी कि जांच को दोबारा शुरू करने का फैसला बिना किसी न्यायिक अधिकार के लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन Maha Vikas Aghadi सरकार ने राजनीतिक द्वेष और व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण ऐसा किया था। कोर्ट अब इस मुख्य कानूनी सवाल पर विचार कर रहा है कि क्या राज्य के पास बंद हो चुके मामलों को दोबारा खोलने की शक्ति है।
जानकारी के मुताबिक, यह मामला सबसे पहले 2019 में अलीबाग के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा ‘A’ समरी क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद बंद हो गया था। इसके बाद 2020 में इसे दोबारा खोला गया। Arnab Goswami को 11 नवंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली थी और मार्च 2021 में हाई कोर्ट ने उन्हें अलीबाग कोर्ट में पेश होने से छूट दी थी। इस याचिका पर अगली सुनवाई 4 सितंबर को होगी।