Hormuz जलडमरूमध्य में फंसा जहाज Arista, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ा तनाव
World : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, Strait of Hormuz में कंटेनर जहाज Arista के फंसने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच विवाद गहरा गया है। ईरान का दावा है कि जहाज ने उसके निर्देशों को नहीं माना, जबकि
World : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, Strait of Hormuz में कंटेनर जहाज Arista के फंसने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच विवाद गहरा गया है। ईरान का दावा है कि जहाज ने उसके निर्देशों को नहीं माना, जबकि अंतरराष्ट्रीय जांच में इस जहाज के पुराने रिकॉर्ड और प्रतिबंधों का मामला सामने आया है।
ईरान के सरकारी टीवी ने 1 जुलाई 2026 को कुछ वीडियो जारी किए। ईरान का कहना है कि एक विदेशी कंटेनर जहाज ने IRGC नेवी द्वारा बताए गए रास्ते का पालन नहीं किया, जिसकी वजह से वह फंस गया। ईरान इस घटना के जरिए जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण को दिखाना चाहता है। हालांकि, शिपिंग मॉनिटर्स की रिपोर्ट कुछ और ही कहानी कह रही है।
TankerTrackers.com जैसी संस्थाओं के मुताबिक, यह जहाज Arista पहले Gauja के नाम से जाना जाता था और पनामा का झंडा इस्तेमाल करता था। जुलाई 2025 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इस जहाज को तेल तस्करी के एक बड़े नेटवर्क से जोड़ा था। आरोप है कि यह नेटवर्क मोहम्मद हुसैन शामखानी द्वारा चलाया जा रहा था, जो ईरान के एक पूर्व सुरक्षा सलाहकार के बेटे हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए जहाज का नाम बदलकर Arista रखा गया और इसे Comoros के फर्जी झंडे के नीचे चलाया गया।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि शामखानी परिवार का यह नेटवर्क बताता है कि कैसे ईरानी रसूखदार लोग अपनी पोजीशन का इस्तेमाल निजी कमाई और खतरनाक कामों के लिए करते हैं। दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के मुताबिक, Strait of Hormuz एक अंतरराष्ट्रीय रास्ता है जहाँ जहाजों को बिना किसी रुकावट के आने-जाने का अधिकार है। अमेरिका का भी यही मानना है कि ईरान इस रास्ते को बंद नहीं कर सकता और न ही किसी जहाज से पहले अनुमति मांग सकता है।
जून 2026 में ईरान ने चेतावनी दी थी कि अब जहाजों को वहां से गुजरने के लिए उनकी अनुमति लेनी होगी, वरना कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने साफ कर दिया कि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी। इस विवाद का असर वैश्विक व्यापार और तेल की सप्लाई पर पड़ सकता है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है।