Delhi से NASA तक का सफर, अनिल मेनन 14 जुलाई 2026 को जाएंगे अंतरिक्ष
World : दिल्ली में पढ़ाई करने वाले अनिल मेनन अब अंतरिक्ष की यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। NASA ने उन्हें इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के मिशन के लिए चुना है। अनिल मेनन 14 जुलाई 2026 को कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्र
World : दिल्ली में पढ़ाई करने वाले अनिल मेनन अब अंतरिक्ष की यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। NASA ने उन्हें इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के मिशन के लिए चुना है। अनिल मेनन 14 जुलाई 2026 को कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से Roscosmos के Soyuz MS-29 अंतरिक्ष यान के जरिए उड़ान भरेंगे।
अनिल मेनन इस मिशन में फ्लाइट इंजीनियर की भूमिका निभाएंगे और Expedition 75 क्रू का हिस्सा होंगे। यह पूरा मिशन करीब आठ महीने का होगा और वे 2027 की शुरुआत में धरती पर वापस लौटेंगे। उनके साथ इस यात्रा में Roscosmos के अंतरिक्ष यात्री Pyotr Dubrov और Anna Kikina भी शामिल रहेंगे।
अनिल मेनन की योग्यता काफी प्रभावशाली है। वे एक भारतीय-अमेरिकी डॉक्टर और मैकेनिकल इंजीनियर होने के साथ-साथ यूनाइटेड स्टेट्स स्पेस फोर्स में कर्नल भी हैं। उन्होंने हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से डिग्री ली है। अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले वे SpaceX के पहले फ्लाइट सर्जन भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने मेडिकल प्रोग्राम बनाने में मदद की थी।
स्पेस स्टेशन पर रहने के दौरान अनिल कई जरूरी वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। वे यह जांचेंगे कि कम गुरुत्वाकर्षण (microgravity) का इंसान की नसों, खून के बहाव और खून की बनावट पर क्या असर पड़ता है। इसके अलावा वे स्टेशन के पानी से IV फ्लूइड बनाने की तकनीक का टेस्ट करेंगे, जो भविष्य में चांद और मंगल ग्रह की यात्राओं के लिए बहुत काम आएगा।
हाल ही में डॉ. अनिल मेनन ने बताया कि वे स्पेस स्टेशन के बाहरी हिस्से पर सूक्ष्मजीवों (microbiological life) की खोज के लिए एक प्रयोग करेंगे। वे यह देखना चाहते हैं कि क्या अंतरिक्ष के कठिन माहौल में बैक्टीरिया जीवित रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे इन प्रयोगों के नतीजे दुनिया के साथ साझा करेंगे। साथ ही उन्होंने एलन मस्क के मंगल मिशन और रॉकेट आधारित सिटी-टू-सिटी ट्रांसपोर्ट के तकनीकी चुनौतियों पर भी अपनी राय दी।