Bihar: सोमालिया से उड़ान भरकर एक छोटा शिकारी पक्षी ‘अमूर फाल्कन’ बिहार के गया पहुंच गया है. इस पक्षी का नाम ‘Apapang’ है जिसने बिना रुके 4,750 किलोमीटर की दूरी महज 95 घंटों में पूरी की. सैटेलाइट ट
Bihar: सोमालिया से उड़ान भरकर एक छोटा शिकारी पक्षी ‘अमूर फाल्कन’ बिहार के गया पहुंच गया है. इस पक्षी का नाम ‘Apapang’ है जिसने बिना रुके 4,750 किलोमीटर की दूरी महज 95 घंटों में पूरी की. सैटेलाइट ट्रैकिंग से पता चला कि यह दुनिया के सबसे लंबे नॉन-स्टॉप हवाई सफर में से एक था.
Apapang की यात्रा और गया पहुंचने का रास्ता
Apapang ने अपनी वापसी की यात्रा 1 मई 2026 के आसपास सोमालिया से शुरू की थी. वह 5 मई 2026 को बिहार के गया क्षेत्र में लैंड हुआ. शुरुआत में यह पक्षी वाराणसी के पास सोन नदी के किनारे उतरा था, जहां एक घंटे आराम करने के बाद वह फिर से उड़ान भरी और 200 किलोमीटर दूर गया के पहाड़ी जंगलों में पहुंचा और वहां रात बिताई.
इस अद्भुत सफर की निगरानी किसने की
Wildlife Institute of India (WII) के डॉक्टर सुरेश कुमार इस पक्षी के रूट को ट्रैक कर रहे थे. Apapang और उसके दो साथी पक्षियों, Ahu और Alang को 11 नवंबर 2025 को मणिपुर के तमेंगलॉन्ग जिले के चिउलुआन गांव में सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाए गए थे. यह काम ‘मणिपुर अमूर फाल्कन ट्रैकिंग प्रोजेक्ट फेज 2’ के तहत किया गया था.
संरक्षण नियम और सामुदायिक प्रयास
अमूर फाल्कन भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित है. तमिलनाडु की पर्यावरण सचिव सुप्रिया साहू ने इस पक्षी की क्षमता और नेविगेशन की तारीफ की है. मणिपुर और नागालैंड के स्थानीय समुदायों ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है, जिन्होंने शिकार वाले इलाकों को इन पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकानों में बदल दिया है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
Apapang ने कितनी दूरी और कितने समय में तय की?
Apapang ने सोमालिया से बिहार के गया तक लगभग 4,750 किलोमीटर की दूरी बिना रुके सिर्फ 95 घंटों में पूरी की.
अमूर फाल्कन की ट्रैकिंग कहां से शुरू हुई थी?
इस पक्षी को 11 नवंबर 2025 को मणिपुर के तमेंगलॉन्ग जिले के चिउलुआन गांव में सैटेलाइट टैग लगाया गया था.