World: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ संघर्ष विराम (सीजफायर) महज 24 घंटे के भीतर ही संकट में पड़ गया है। लेबनान में इजरायली हवाई हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के बंद होने की खबरों ने पूरी दुनिया को डरा दिया है।
World: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ संघर्ष विराम (सीजफायर) महज 24 घंटे के भीतर ही संकट में पड़ गया है। लेबनान में इजरायली हवाई हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के बंद होने की खबरों ने पूरी दुनिया को डरा दिया है। अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति रुक जाएगी, जिसका सीधा असर भारत समेत दुनिया भर में ईंधन की कीमतों पर पड़ेगा।
सीजफायर क्यों टूटा और अभी क्या स्थिति है?
अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की मदद से दो हफ्ते के लिए युद्धविराम हुआ था। लेकिन ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने इस समझौते की शर्तों को तोड़ा है। वहीं, इजरायल ने लेबनान के बेरूत जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में भीषण हमले किए हैं, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। ईरान ने इन हमलों के जवाब में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि सीजफायर इस शर्त पर था कि तेल मार्ग पूरी तरह खुलेगा, लेकिन अब स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से आम आदमी पर क्या असर होगा?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल और गैस शिपिंग का सबसे अहम रास्ता है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल यहीं से गुजरता है। इस मार्ग के बंद होने से ग्लोबल सप्लाई चेन टूट जाएगी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे देश जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, वहां पेट्रोल और डीजल महंगा हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि इस नाकेबंदी से दुनिया के गरीब देशों का दम घुट जाएगा और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा।
मौजूदा संकट के मुख्य आंकड़े
| विवरण |
जानकारी |
| फंसे हुए जहाज |
लगभग 2,000 तेल और गैस टैंकर |
| फंसे हुए नाविक |
करीब 20,000 लोग |
| फंसा हुआ कच्चा तेल |
12.5 करोड़ बैरल |
| लेबनान में मौतें (9 अप्रैल) |
254 मौतें, 1,165 घायल |
| तेल आपूर्ति प्रभाव |
वैश्विक आपूर्ति का 1/5 हिस्सा प्रभावित |