UP: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक एंबुलेंस हादसे का शिकार हो गई। यह हादसा तब हुआ जब एंबुलेंस चालक मरीज को सैफई PGI में छोड़कर वापस लौट रहा था। ड्राइविंग के दौरान चालक को झपकी आ गई, जिससे गाड़ी अनियंत्रित होकर दूसरे वाहन से
UP: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक एंबुलेंस हादसे का शिकार हो गई। यह हादसा तब हुआ जब एंबुलेंस चालक मरीज को सैफई PGI में छोड़कर वापस लौट रहा था। ड्राइविंग के दौरान चालक को झपकी आ गई, जिससे गाड़ी अनियंत्रित होकर दूसरे वाहन से टकरा गई। इस टक्कर में एंबुलेंस चालक और EMT घायल हो गए हैं।
हादसा कैसे हुआ और क्या थी वजह?
मिली जानकारी के अनुसार, एंबुलेंस चालक मरीज को सैफई PGI पहुंचाने के बाद वापसी की राह पर था। एक्सप्रेसवे पर गाड़ी चलाते समय उसे नींद आ गई और वह झपकी लेने लगा। इसी वजह से एंबुलेंस सामने से आ रहे या बगल के वाहन से टकरा गई। इस हादसे में चालक और उसके साथ मौजूद EMT को चोटें आई हैं।
एक्सप्रेसवे पर नींद की झपकी से बढ़ते हादसे
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर ड्राइवरों का सो जाना एक गंभीर समस्या बन गया है। खासकर रात 12 बजे से सुबह 4 बजे के बीच ऐसे हादसे ज्यादा होते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, थाठिया और सौरिख के बीच 73 किलोमीटर के हिस्से में पिछले दो महीनों में झपकी आने की वजह से 13 लोगों की जान जा चुकी है। प्रशासन ड्राइवरों को रेस्ट एरिया में आराम करने की सलाह देता है ताकि सफर सुरक्षित रहे।
एंबुलेंस ड्राइवरों की चुनौतियां और नियम
देश में एंबुलेंस ड्राइवरों पर काम का काफी दबाव रहता है। कई बार उन्हें बिना पर्याप्त ट्रेनिंग के हाई-स्पीड ट्रैफिक में गाड़ी चलानी पड़ती है। नियमों के मुताबिक ड्यूटी 12 घंटे की होनी चाहिए, लेकिन कुछ मामलों में ड्राइवरों को 15 दिनों तक लगातार 24 घंटे की शिफ्ट में काम करना पड़ता है, जिससे थकान बढ़ती है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। वर्तमान में एंबुलेंस ड्राइवर बनने के लिए केवल HMV लाइसेंस की जरूरत होती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हादसे का मुख्य कारण क्या रहा?
इस हादसे की मुख्य वजह चालक को नींद की झपकी आना था, जिसके कारण एंबुलेंस अनियंत्रित होकर दूसरे वाहन से टकरा गई।
एक्सप्रेसवे पर किस समय हादसे ज्यादा होते हैं?
आमतौर पर रात 12 बजे से सुबह 4 बजे के बीच ड्राइवरों के सोने की वजह से इस एक्सप्रेसवे पर हादसे अधिक होते हैं।