Finance : बाजार में सामान खरीदते समय आपने देखा होगा कि कई उत्पादों पर MRP बहुत ज्यादा लिखी होती है और फिर भारी डिस्काउंट दिया जाता है। All India Consumer Panchayat (ABGP) ने इसी मनमानी MRP के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सं
Finance : बाजार में सामान खरीदते समय आपने देखा होगा कि कई उत्पादों पर MRP बहुत ज्यादा लिखी होती है और फिर भारी डिस्काउंट दिया जाता है। All India Consumer Panchayat (ABGP) ने इसी मनमानी MRP के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन का आरोप है कि कंपनियां अपनी मर्जी से कीमतें तय कर रही हैं, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
MRP तय करने के लिए नया कानून क्यों चाहिए
ABGP का कहना है कि मौजूदा MRP सिस्टम पारदर्शी नहीं है। संगठन ने मांग की है कि MRP डिमांड के आधार पर नहीं, बल्कि लागत (Cost) के आधार पर तय होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि उत्पादों पर उनकी प्रोडक्शन कॉस्ट और पहली बिक्री की कीमत लिखना अनिवार्य किया जाए। इस मुद्दे को लेकर इटावा-औरैया और पन्ना जैसे इलाकों में अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए हैं।
दवाइयों और ऑनलाइन शॉपिंग में ज्यादा अंतर
संगठन ने विशेष रूप से दवाइयों और मेडिकल डिवाइस की बढ़ी हुई कीमतों पर चिंता जताई है। साथ ही, ऑनलाइन और फिजिकल दुकानों के बीच कीमतों में होने वाले बड़े अंतर को भी मुद्दा बनाया है। ABGP ने 25 मई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है ताकि केंद्र सरकार इस पर सख्त कदम उठाए।
उपभोक्ताओं के पास क्या हैं कानूनी अधिकार
Legal Metrology Act, 2009 के तहत किसी भी पैक्ड सामान को उसकी MRP से ज्यादा कीमत पर बेचना गैरकानूनी है। ऐसा करने पर जुर्माना और जेल दोनों हो सकते हैं। Consumer Protection Act, 2019 भी ग्राहकों को अनुचित व्यापार प्रथाओं से बचाता है। अगर कोई दुकानदार MRP से ज्यादा पैसे मांगता है, तो ग्राहक नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर 1915 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अगर दुकानदार MRP से ज्यादा पैसे मांगे तो क्या करें
ग्राहक टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल कर सकते हैं या consumerhelpline.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। Legal Metrology Act के तहत MRP से ऊपर बेचना अपराध है।
ABGP की मुख्य मांगें क्या हैं
संगठन चाहता है कि MRP तय करने के लिए एक स्वतंत्र अथॉरिटी बने, उत्पादों पर प्रोडक्शन कॉस्ट लिखी जाए और भ्रामक डिस्काउंट पर पूरी तरह रोक लगे।