UP: अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से की मुलाकात, राम मंदिर दान चोरी मामले पर साधा निशाना
UP/Lucknow: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार सुबह लखनऊ में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की। यह पिछले चार महीनों में उनकी दूसरी बैठक थी। इस मुलाकात के दौरान दोनों न
UP/Lucknow: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार सुबह लखनऊ में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की। यह पिछले चार महीनों में उनकी दूसरी बैठक थी। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने सनातन धर्म पर आए संकट को दूर करने और राम मंदिर में दान चोरी के आरोपों पर लंबी चर्चा की।
अखिलेश यादव ने राम मंदिर में कथित दान चोरी को सनातन धर्म में महापाप बताया। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी अपने फायदे के लिए भगवान श्री राम की मर्यादा के साथ खिलवाड़ कर रही है। अखिलेश ने इस मामले की जांच कर रही SIT की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और इसे लीपापोती करार दिया। उन्होंने दावा किया कि SIT के एक सदस्य पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। सपा प्रमुख ने मांग की कि राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष को इस्तीफा देना चाहिए और मंदिर के सभी कर्मचारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच होनी चाहिए ताकि भाजपा सदस्यों की भूमिका साफ हो सके।
वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गोमाता की स्थिति पर गहरी चिंता जताई। वे अपनी 81 दिनों की गोविष्टि गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के जरिए गायों को राष्ट्रीय सम्मान दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने राम मंदिर प्रबंधन में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए कहा कि मंदिर में घोटाला हुआ है। स्वामी जी ने सुझाव दिया कि RSS के सदस्यों को मंदिर प्रबंधन से दूर रहना चाहिए क्योंकि उनकी विचारधारा अलग है। उन्होंने कहा कि मंदिर का प्रबंधन संतों के हाथ में होना चाहिए।
इस मामले में कानूनी और पुलिस कार्रवाई भी जारी है। 8 जुलाई 2026 को पुलिस ने तीन आरोपियों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे को 40 घंटे की हिरासत में लिया है। SIT की जांच की समय सीमा 15 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी गई है। शुरुआती रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज गायब होने और गिनती के दौरान लापरवाही जैसी बातें सामने आई हैं। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है, जहां 13 जुलाई 2026 को सीबीआई जांच या विशेष SIT के गठन की याचिका पर सुनवाई हो सकती है।