हवाई सफर के दौरान बढ़ रहा है Turbulence का खतरा, DGCA ने जारी किए नए सेफ्टी नियम

World: आसमान में उड़ान भरते समय विमानों में होने वाले झटकों यानी टर्बुलेंस की समस्या अब बढ़ती जा रही है। जलवायु परिवर्तन की वजह से हवाओं के दबाव में बदलाव हो रहा है, जिससे फ्लाइट्स में अचानक झटके लगने की घटनाएं ज्यादा हो

World: आसमान में उड़ान भरते समय विमानों में होने वाले झटकों यानी टर्बुलेंस की समस्या अब बढ़ती जा रही है। जलवायु परिवर्तन की वजह से हवाओं के दबाव में बदलाव हो रहा है, जिससे फ्लाइट्स में अचानक झटके लगने की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं। भारत में पहली बार हवाई यात्रा करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में सीट बेल्ट बांधे रखना अब और भी जरूरी हो गया है ताकि किसी गंभीर चोट से बचा जा सके।

University of Reading के शोधकर्ताओं ने बताया कि कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के कारण गर्म हवाएं जेट स्ट्रीम में विंड शीयर को बढ़ा रही हैं। प्रोफेसर पॉल डी विलियम्स के मुताबिक, इस सदी के अंत तक कुछ रूट्स पर गंभीर क्लियर-एयर टर्बुलेंस (CAT) की घटनाएं दो से तीन गुना तक बढ़ सकती हैं। यह टर्बुलेंस इसलिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसे रडार या सैटेलाइट से नहीं देखा जा सकता, जिससे पायलटों को भी इसका अंदाजा नहीं लग पाता।

भारत में इस समस्या को देखते हुए DGCA ने 22 जून 2025 को अपने दिशा-निर्देशों में बदलाव किए हैं। नए नियमों के मुताबिक, अब खराब मौसम या टर्बुलेंस के दौरान समय पर पहुंचने से ज्यादा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। पायलटों को जरूरत पड़ने पर फ्लाइट का रास्ता बदलने या उसे वापस मोड़ने की सलाह दी गई है। साथ ही, अब पायलटों को आइस क्रिस्टल आइसिंग से बचने के लिए विमान को किनारे से ले जाने और यात्रियों व क्रू को तुरंत जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत के उत्तरी हिस्सों में और खासकर मार्च से मई (प्री-मानसून सीजन) के दौरान टर्बुलेंस की घटनाएं काफी बढ़ेंगी। साल 2050 से 2080 के बीच क्लियर-एयर टर्बुलेंस में 100 से 200 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी कई एयरलाइंस में ऐसी स्थितियां देखी गई हैं, इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी सीट पर बैठे समय हमेशा सीट बेल्ट बांधकर रखें।