India: इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (IIPS) की एक नई स्टडी में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। रिसर्च में पाया गया है कि हवा में बढ़ता प्रदूषण और जमीन के नीचे का गंदा पानी भारतीय महिलाओं की सेहत बिगाड़ रहा
India: इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (IIPS) की एक नई स्टडी में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। रिसर्च में पाया गया है कि हवा में बढ़ता प्रदूषण और जमीन के नीचे का गंदा पानी भारतीय महिलाओं की सेहत बिगाड़ रहा है। इसका सीधा असर महिलाओं के शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों और उनके समय पर पड़ रहा है।
प्रदूषण का शरीर पर क्या असर हो रहा है?
स्टडी में बताया गया है कि ज्यादा प्रदूषण की वजह से महिलाओं में मेनोपॉज (पीरियड्स का बंद होना) समय से पहले हो रहा है। उत्तर भारत के राज्यों, जैसे Delhi और UP में जहां प्रदूषण ज्यादा है, वहां यह असर सबसे अधिक देखा गया है। वहीं, दक्षिण भारत और Maharashtra में जमीन के नीचे के पानी में मिलावट की वजह से महिलाओं के शरीर में जैविक बदलाव आ रहे हैं।
पानी में कौन से जहरीले तत्व हैं और क्या नुकसान है?
रिसर्च के मुताबिक, पश्चिम और दक्षिण भारत के इलाकों में पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है। इससे महिलाओं में पीरियड्स की शुरुआत (Menarche) में देरी हो रही है और मेनोपॉज जल्दी आ रहा है। इस स्टडी के लिए National Family Health Survey (2019-2021) के डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया।
सेहत सुधारने का क्या तरीका बताया गया है?
प्रोफेसर अपराजिता चट्टोपाध्याय और उनकी टीम ने पाया है कि प्रकृति और हरियाली के करीब रहने से इन समस्याओं को कम किया जा सकता है। जिन इलाकों में पेड़-पौधे और ग्रीन कवर ज्यादा है, वहां महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ ज्यादा स्थिर और बेहतर पाई गई है।
| प्रभावित क्षेत्र |
मुख्य कारण |
असर |
| उत्तर भारत (Delhi, UP) |
हवा का प्रदूषण (PM2.5) |
मेनोपॉज का जल्दी आना |
| दक्षिण और पश्चिम भारत (Maharashtra) |
पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड |
पीरियड्स की शुरुआत में देरी और जल्दी मेनोपॉज |