Delhi: AIIMS दिल्ली के विशेषज्ञों ने गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर यानी प्री-एक्लेम्पसिया (Preeclampsia) को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है। डॉक्टरों के मुताबिक, मेडिकल सुविधाओं में सुधार के बाद भी यह बीमारी मां और हो
Delhi: AIIMS दिल्ली के विशेषज्ञों ने गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर यानी प्री-एक्लेम्पसिया (Preeclampsia) को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है। डॉक्टरों के मुताबिक, मेडिकल सुविधाओं में सुधार के बाद भी यह बीमारी मां और होने वाले बच्चे के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है। भारत में हर साल करीब 2 से 4 लाख महिलाएं इस समस्या से जूझती हैं, जो मातृ मृत्यु दर का तीसरा सबसे बड़ा कारण है।
गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर के क्या हैं खतरे और लक्षण
AIIMS की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. नीना मल्होत्रा ने बताया कि प्री-एक्लेम्पसिया एक गंभीर स्थिति है, लेकिन इसे सही समय पर पहचान कर इलाज किया जा सकता है। कई महिलाएं शुरुआती लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे वे बहुत देर से अस्पताल पहुंचती हैं। उन्होंने साफ किया कि प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर को किसी भी हाल में सामान्य नहीं मानना चाहिए। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो इससे दौरे पड़ना, स्ट्रोक, अंगों का फेल होना और समय से पहले डिलीवरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
किन महिलाओं को रहता है ज्यादा रिस्क और क्या है बचाव
डॉ. के अपर्णा शर्मा और डॉ. विदुषी कुलश्रेष्ठ के अनुसार, पहली तिमाही (First Trimester) में स्क्रीनिंग से हाई-रिस्क महिलाओं की पहचान हो सकती है। खासकर उन महिलाओं को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए जिन्हें डायबिटीज, मोटापा, पहले से बीपी की समस्या है या जिनकी प्रेग्नेंसी IVF के जरिए हुई है। इसके अलावा जुड़वा बच्चों की प्रेग्नेंसी और परिवार में बीपी का इतिहास होने पर भी खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने बताया कि हाई-रिस्क मामलों में डॉक्टर की सलाह पर कम खुराक वाली एस्पिरिन (Low-dose aspirin) लेने से गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया का खतरा काफी कम हो जाता है।
बचाव के लिए क्या करें और किन बातों का ध्यान रखें
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करवाना सबसे जरूरी है। इसके साथ ही मेडिकल गाइडेंस में योग करना और खान-पान में सुधार करना फायदेमंद रहता है। यह केवल डिलीवरी के समय का खतरा नहीं है, बल्कि जिन महिलाओं को प्री-एक्लेम्पसिया होता है, उन्हें भविष्य में दिल की बीमारी और हाई बीपी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
प्री-एक्लेम्पसिया क्या है और यह कितना खतरनाक है?
यह गर्भावस्था के दौरान होने वाला हाई ब्लड प्रेशर है जो मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है। भारत में यह मातृ मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण है और सालाना 2 से 4 लाख महिलाएं इससे प्रभावित होती हैं।
किन महिलाओं को इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है?
जिन महिलाओं को डायबिटीज, मोटापा, हाई बीपी की समस्या है, या जिनकी प्रेग्नेंसी IVF के जरिए हुई है, उन्हें अधिक खतरा होता है। साथ ही जुड़वा बच्चों की प्रेग्नेंसी और फैमिली हिस्ट्री वाले लोग भी रिस्क जोन में रहते हैं।