AI को अब सुनाई देगी भारतीय वन्यजीवों की आवाज, 59 वॉलंटियर्स ने तैयार की खास साउंड लाइब्रेरी

World: ग्लोबल AI मॉडल अब तक भारतीय वन्यजीवों की आवाजों को पहचानने में मुश्किल महसूस कर रहे थे क्योंकि उन्हें ज्यादातर बाहरी देशों के डेटा पर ट्रेन किया गया था। इस कमी को दूर करने के लिए 59 वॉलंटियर्स ने मिलकर भारत की पहल

World: ग्लोबल AI मॉडल अब तक भारतीय वन्यजीवों की आवाजों को पहचानने में मुश्किल महसूस कर रहे थे क्योंकि उन्हें ज्यादातर बाहरी देशों के डेटा पर ट्रेन किया गया था। इस कमी को दूर करने के लिए 59 वॉलंटियर्स ने मिलकर भारत की पहली ओपन और क्राउडसोर्स्ड साउंड लाइब्रेरी तैयार की है। यह लाइब्रेरी अब AI को भारत के जंगलों और जानवरों की सटीक पहचान करने में मदद करेगी।

Indian Ecoacoustics Network (IEN) के बैनर तले काम कर रहे इन विशेषज्ञों और उत्साही लोगों ने भारत के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से वन्यजीवों की रिकॉर्डिंग जुटाई है। इस डेटासेट में कुल 518 प्रजातियों की 5,815 मिनट की रिकॉर्डिंग शामिल है। इस पूरी मेहनत के बाद इसे 21 जुलाई 2026 को bioRxiv सर्वर पर पब्लिश किया गया और अब Nature Research की Scientific Data जर्नल इसकी समीक्षा कर रही है।

मुंबई की इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन साइंटिस्ट और IEN की को-फाउंडर पूजा चोक्सी ने बताया कि आमतौर पर पक्षियों की गिनती के लिए पॉइंट काउंट तरीका अपनाया जाता है। लेकिन यह ओपन-एक्सेस डेटासेट जैव विविधता की निगरानी को बेहतर बनाने और AI की क्षमता को बढ़ाने में एक साझा संसाधन की तरह काम करेगा। हैदराबाद में राम दयाल वैष्णव, डॉ. चित्रा शंकर और प्रसन दत्त राजू ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए फील्डवर्क किया।