पक्षियों की भाषा समझने में AI की बड़ी कामयाबी, डॉ जूली एली को मिला खास अवॉर्ड
World: वैज्ञानिकों ने पक्षियों की बोलचाल समझने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले की डॉ जूली एली ने AI की मदद से ज़ेबरा फिंच पक्षियों की 11 अलग-अलग आवाजों का मतलब समझा लिया है। इस
World: वैज्ञानिकों ने पक्षियों की बोलचाल समझने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले की डॉ जूली एली ने AI की मदद से ज़ेबरा फिंच पक्षियों की 11 अलग-अलग आवाजों का मतलब समझा लिया है। इस रिसर्च के लिए उन्हें 2026 का कॉलर-डोलिटल प्राइज दिया गया है, जिसमें 1 लाख डॉलर की इनामी राशि शामिल है।
डॉ जूली एली ने पिछले 15 सालों तक इन पक्षियों का अध्ययन किया। उन्होंने हजारों पक्षियों की आवाजों को रिकॉर्ड किया और मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल कर उनके पैटर्न को पहचाना। रिसर्च में यह बात सामने आई कि ये पक्षी केवल आवाज नहीं निकालते, बल्कि उनके संकेतों में एक खास मतलब होता है। प्रयोगों के दौरान देखा गया कि पक्षी उन आवाजों को एक जैसा मानते हैं जिनका मतलब समान होता है, भले ही उनकी ध्वनि अलग हो।
तेल अवीव यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर योसी योवेल ने इस उपलब्धि को इस क्षेत्र का एक अहम मोड़ बताया है। वहीं लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर जोनाथन बिर्च ने इसे शानदार काम कहा है। जेरेमी कॉलर फाउंडेशन, जिसने इस पुरस्कार की शुरुआत की, का मानना है कि AI की मदद से 2030 तक इंसानों और जानवरों के बीच बातचीत का कोड क्रैक किया जा सकता है।
हालांकि, प्रोफेसर योवेल ने यह भी साफ किया कि जानवरों के साथ पूरी तरह से दोतरफा बातचीत करना अभी भी एक बड़ी वैज्ञानिक चुनौती है। जेरेमी कॉलर फाउंडेशन ने उन शोधकर्ताओं के लिए 1 करोड़ डॉलर के बड़े इनाम की घोषणा भी की है, जो इंसानों और जानवरों के बीच सफल दोतरफा संवाद स्थापित कर पाएंगे।