Afghanistan में लड़कियों की पढ़ाई बंद और लड़कों के सिलेबस में बदलाव, तालिबान पर लगे गंभीर आरोप
World: अफगानिस्तान में शिक्षा व्यवस्था को लेकर हालात काफी चिंताजनक हो गए हैं। यहाँ लड़कियों को स्कूल और यूनिवर्सिटी जाने से रोका गया है, वहीं लड़कों के लिए पढ़ाई के सिलेबस को पूरी तरह बदल दिया गया है। जानकारों का कहना है
World: अफगानिस्तान में शिक्षा व्यवस्था को लेकर हालात काफी चिंताजनक हो गए हैं। यहाँ लड़कियों को स्कूल और यूनिवर्सिटी जाने से रोका गया है, वहीं लड़कों के लिए पढ़ाई के सिलेबस को पूरी तरह बदल दिया गया है। जानकारों का कहना है कि शिक्षा का इस्तेमाल अब बच्चों को कट्टरपंथी विचारधारा सिखाने के लिए किया जा रहा है।
तालिबान ने सितंबर 2021 में छठी कक्षा के बाद लड़कियों की पढ़ाई पर रोक लगा दी थी और दिसंबर 2022 में महिलाओं के यूनिवर्सिटी जाने पर पाबंदी कर दी। UNICEF की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच सालों में करीब 26 लाख लड़कियों को सेकेंडरी एजुकेशन से वंचित रखा गया है। UNESCO का अनुमान है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो 2030 तक यह संख्या 40 लाख तक पहुंच सकती है। इस फैसले से देश की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ा है, जिससे हर साल करीब 84 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है।
लड़कों की शिक्षा में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अगस्त 2021 के बाद से ही सिलेबस बदला जाने लगा और दिसंबर 2022 में एक नई स्कीम लागू की गई। अब स्कूलों में फिजिक्स और बायोलॉजी जैसे आधुनिक विषयों की जगह धार्मिक संघर्ष और कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा देने वाले पाठ पढ़ाए जा रहे हैं।
| हटाए गए विषय | जोड़े गए या बढ़ाए गए विषय |
|---|---|
| फॉर्मल आर्ट, सिविल एजुकेशन, मानवाधिकार, लोकतंत्र, संविधान, जीवन कौशल (Life Skills) | धार्मिक विज्ञान, कुरान की पढ़ाई और जिहाद पर आधारित शिक्षा |
इन बदलावों के कारण बच्चों के व्यवहार में भी असर देखा गया है। कई लड़के अब कट्टरपंथी सोच रखने लगे हैं और महिलाओं के अधिकारों को दबाने का समर्थन कर रहे हैं। इसके अलावा, महिला शिक्षकों पर रोक की वजह से स्कूलों में योग्य स्टाफ की भारी कमी हो गई है। तालिबान अब हर जिले में करीब 10 मदरसे खोलने की योजना बना रहा है, जहाँ उनकी पसंद का सिलेबस पढ़ाया जाएगा। हालांकि, अप्रैल 2026 की कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि कुछ युवा अब भी उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं और कट्टरपंथ को नकार रहे हैं।