Delhi, Mumbai और Bengaluru जैसे शहरों में समय बिताने के लिए नहीं हैं सस्ते विकल्प, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Urban Life: दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के लिए अब खाली समय बिताना महंगा होता जा रहा है। एक सोशल मीडिया वीडियो के जरिए यह सवाल उठाया गया है कि इन शहरों में खाने-पीने या शॉपिंग करने

Urban Life: दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के लिए अब खाली समय बिताना महंगा होता जा रहा है। एक सोशल मीडिया वीडियो के जरिए यह सवाल उठाया गया है कि इन शहरों में खाने-पीने या शॉपिंग करने के अलावा समय बिताने के लिए बहुत कम सस्ते विकल्प बचे हैं। इस बात पर इंटरनेट पर बड़ी बहस छिड़ गई है और बहुत से लोग इस बात से सहमत दिख रहे हैं।

Instagram पर @the.headless नाम के कंटेंट क्रिएटर ने एक वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होंने कहा कि बड़े शहरों का विकास अब सिर्फ मॉल, रेस्टोरेंट और कमर्शियल हब के इर्द-गिर्द हो रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि शहरों में ऐसी पब्लिक जगहों की कमी है जहाँ लोग बिना पैसे खर्च किए जा सकें। उनके मुताबिक, शहरी प्लानिंग में नागरिकों से ज्यादा उपभोक्ताओं (consumers) पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे आम आदमी के लिए खुले और मुफ्त सांस्कृतिक स्थानों की कमी हो गई है।

इस वीडियो के बाद India Today और Hindustan Times जैसी मीडिया संस्थाओं ने भी इस चर्चा को कवर किया। कई यूजर्स ने अपनी राय साझा करते हुए कहा कि भारतीय शहरों को ऐसे समावेशी स्थानों की जरूरत है जहाँ लोग बिना जेब ढीली किए समय बिता सकें।

यह समस्या सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है। UN-Habitat की वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, भारत के आठ सबसे बड़े शहरों में किफायती घरों की संख्या में भारी गिरावट आई है। साल 2018 में नए घरों की सप्लाई में करीब 52% हिस्सा किफायती घरों का था, जो 2025 तक घटकर सिर्फ 17% रह गया। इसके अलावा, KPMG की एक रिपोर्ट में बताया गया कि शहरी भारत देश की जीडीपी में करीब 60% योगदान देता है, इसलिए शहरी विकास की नीतियों को अब जमीनी हकीकत के हिसाब से बदलने की जरूरत है ताकि आम नागरिक को राहत मिल सके।