Abu Dhabi में पहली बार आया रोबोटिक प्लेटफॉर्म, अब फेफड़ों के कैंसर का होगा जल्दी और सटीक इलाज

World : अबू धाबी के क्लीवलैंड क्लिनिक में मिडिल ईस्ट का पहला रोबोट-असिस्टेड ब्रोंकोस्कोपी प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। यह तकनीक फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती पहचान करने में बहुत मददगार साबित होगी। इसकी मदद से डॉक्टर फेफड़ो

World : अबू धाबी के क्लीवलैंड क्लिनिक में मिडिल ईस्ट का पहला रोबोट-असिस्टेड ब्रोंकोस्कोपी प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। यह तकनीक फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती पहचान करने में बहुत मददगार साबित होगी। इसकी मदद से डॉक्टर फेफड़ों के उन छोटे हिस्सों तक आसानी से पहुंच पाएंगे जहां पहुंचना पहले मुश्किल था।

इस आधुनिक तकनीक को MONARCH™ प्लेटफॉर्म कहा जाता है, जिसे 28 जुलाई 2026 को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया। यह प्लेटफॉर्म जॉनसन एंड जॉनसन के मेडटेक विभाग द्वारा उपलब्ध कराया गया है। इसमें MONARCH™ QUEST नाम का नया अपडेट भी शामिल है, जो AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से फेफड़ों के अंदर सही रास्ता खोजने और सटीक जांच करने में मदद करता है।

क्लीवलैंड क्लिनिक अबू धाबी के सीईओ डॉ. जॉर्ज-पास्कल हाबर ने बताया कि इस निवेश से मरीजों को सुरक्षित और कम दर्दनाक इलाज मिलेगा, जिससे जांच की सटीकता बढ़ेगी। वहीं पल्मोनरी मेडिसिन के विभाग प्रमुख डॉ. ज़ैद ज़ुमोट ने कहा कि यह तकनीक फेफड़ों की बीमारियों के निदान में एक बड़ी कामयाबी है। इससे उन छोटे नोड्यूल्स की बायोप्सी ली जा सकती है, जिन्हें पहले पकड़ना मुश्किल था। अगर कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए, तो मरीज के बचने की संभावना 70 प्रतिशत से ज्यादा हो जाती है।

इस पूरी प्रक्रिया की कुछ खास बातें नीचे दी गई हैं:

  • यह एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है, यानी इसमें शरीर पर बड़ा चीरा नहीं लगाया जाता।
  • पूरा ऑपरेशन जनरल एनेस्थीसिया के तहत होता है और इसमें करीब 30 से 75 मिनट का समय लगता है।
  • यह केवल कैंसर ही नहीं, बल्कि टीबी (Tuberculosis) और अन्य फेफड़ों की सूजन वाली बीमारियों की जांच में भी कारगर है।
  • अबू धाबी का यह अस्पताल मिडिल ईस्ट का पहला ऐसा सेंटर बन गया है जहां यह तकनीक उपलब्ध है।

अबू धाबी के हेल्थ डिपार्टमेंट ने इस तकनीक को लागू करने में पूरा सहयोग किया है। आने वाले समय में इस रोबोटिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल फेफड़ों के नोड्यूल्स के इलाज के लिए हीट या कोल्ड थेरेपी जैसे सर्जिकल हस्तक्षेपों में भी किया जा सकता है।