Mumbai में खुले मैदानों के ‘कब्जे’ के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे Aaditya Thackeray, BJP पर लगाया जमीन हड़पने का आरोप

Maharashtra/Mumbai: शिव सेना (UBT) के विधायक Aaditya Thackeray मुंबई के जुहू और अंधेरी वेस्ट इलाके में तीन खुले मैदानों के कथित कब्जे के खिलाफ विरोध मार्च निकालेंगे। उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा एमएलसी Amrish Patel के

Maharashtra/Mumbai: शिव सेना (UBT) के विधायक Aaditya Thackeray मुंबई के जुहू और अंधेरी वेस्ट इलाके में तीन खुले मैदानों के कथित कब्जे के खिलाफ विरोध मार्च निकालेंगे। उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा एमएलसी Amrish Patel के नेतृत्व वाले एक ट्रस्ट ने इन सार्वजनिक जगहों को हथियाने की कोशिश की है। आदित्य ठाकरे ने इस मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि भाजपा अपने करीबियों के लिए मुंबई की खुली जगहों को ‘चुराने’ की कोशिश कर रही है।

यह पूरा विवाद जुहू और अंधेरी वेस्ट के तीन प्लॉट से जुड़ा है। इनमें 12 एकड़ का Chhatrapati Shivaji Maharaj Sports Complex और दो अन्य छोटे प्लॉट शामिल हैं। आदित्य ठाकरे ने 5 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis को पत्र लिखकर इन जमीनों के आवंटन को रद्द करने की मांग की थी। उनका कहना है कि 16 एकड़ जमीन भाजपा एमएलसी को सौंपी जा रही है, जिसमें से दो प्लॉट मुफ्त दिए गए हैं और एक बहुत ही कम कीमत पर। उन्होंने यह भी बताया कि जो स्थानीय लोग पहले इन मैदानों का इस्तेमाल करते थे, अब उन्हें ट्रस्ट द्वारा ‘अतिक्रमणकारी’ (trespassers) कहा जा रहा है और वहां बोर्ड लगा दिए गए हैं।

दूसरी तरफ, Shri Vile Parle Kelavani Mandal (SVKM) के ट्रस्टी Amrish Patel का कहना है कि आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है और पूरी प्रक्रिया नियमों के मुताबिक रही है। उन्होंने दावा किया कि इन मैदानों का उपयोग केवल ट्रस्ट के छात्रों के लिए खेल सुविधाओं के लिए किया जाएगा और वहां कोई निर्माण कार्य नहीं होगा। वहीं, मुंबई भाजपा अध्यक्ष Ameet Satam ने भी इन आवंटनों पर आपत्ति जताई है और MHADA को इसे रद्द करने के लिए पत्र लिखा है। उनका कहना है कि आरक्षित खुले स्थानों का अधिकार सभी नागरिकों को होना चाहिए, न कि कुछ चुनिंदा लोगों को।

इस मामले में स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता भी आगे आए हैं। Gulmohar Area Societies Welfare Group के अशोक पंडित और आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मांग की है कि सरकारी जमीनों का रखरखाव सरकार को ही करना चाहिए। उनका कहना है कि निजी पार्टियों को जमीन देने से आम जनता का रास्ता बंद हो जाता है। नियमों के मुताबिक, डेवलपमेंट प्लान 2034 के तहत ये जगहें सार्वजनिक खुली जगह के रूप में आरक्षित हैं और इन्हें हमेशा जनता के लिए खुला रखना होगा।