Maharashtra में छात्र प्रदर्शनों पर केस वापस लेने को लेकर उलझन, Aaditya Thackeray ने DGP से मांगा स्पष्टीकरण
Maharashtra: राज्य सरकार ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का फैसला किया है, लेकिन जमीन पर इसे लागू करने को लेकर काफी भ्रम बना हुआ है। इसी मुद्दे पर Shiv Sena (UBT) नेता Aaditya Thackeray ने शनिव
Maharashtra: राज्य सरकार ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का फैसला किया है, लेकिन जमीन पर इसे लागू करने को लेकर काफी भ्रम बना हुआ है। इसी मुद्दे पर Shiv Sena (UBT) नेता Aaditya Thackeray ने शनिवार को महाराष्ट्र के DGP Rashmi Shukla को पत्र लिखा है। उन्होंने पूछा है कि सरकार के इस फैसले को असल में कैसे लागू किया जाएगा ताकि छात्रों को राहत मिल सके।
दरअसल, मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने 28 जुलाई 2026 को गृह विभाग को निर्देश दिए थे कि जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शनों, NEET पेपर लीक और सोनम वांगचुक व अभिजीत डिपके के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए। सरकार ने यह भी कहा था कि इन मामलों में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई न की जाए।
Aaditya Thackeray ने अपने पत्र में कहा कि सरकार के आदेश के बावजूद कई छात्रों को अब भी पुलिस नोटिस मिल रहे हैं और अदालती कार्यवाही जारी है। उन्होंने DGP से मांग की है कि इस पूरे मामले में स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि पूरे राज्य में एक जैसा नियम लागू हो। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या नए कानूनों (BNS और BNSS) के तहत चल रही जांच पर तुरंत रोक लगेगी और क्या पुलिस स्टेशन खुद केस वापस लेंगे या छात्रों को अलग से आवेदन करना होगा।
दूसरी तरफ, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच को बीच में नहीं रोका जा सकता। जब तक चार्जशीट दाखिल नहीं होती और अदालत केस वापस लेने की मंजूरी नहीं देती, तब तक बयान दर्ज करने और पंचनामा जैसी कानूनी प्रक्रियाएं चलती रहेंगी। AISF मुंबई के अध्यक्ष आमिर काजी ने बताया कि सरकारी घोषणा के बाद भी छात्रों को पुलिस के फोन और नोटिस आ रहे हैं, जिससे उनमें डर का माहौल है।
Aaditya Thackeray ने यह भी साफ किया कि Shiv Sena (UBT) प्रभावित छात्रों को मुफ्त कानूनी मदद देगी और इसके लिए उन्होंने छात्रों को पार्टी के लीगल सेल से संपर्क करने को कहा है।