Lucknow पहुंची 8वें वेतन आयोग की टीम, कर्मचारियों की पुरानी पेंशन और वेतन वृद्धि पर होगी अहम बैठक
UP/Lucknow: आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की टीम लखनऊ पहुंच चुकी है। यह टीम 22 और 23 जून, 2026 को विभिन्न कर्मचारी संगठनों और अधिकारियों के साथ बैठक करेगी। इन मुलाकातों का मकसद वेतन, भत्तों और पेंशन सिस्टम में सुधार के लिए सु
UP/Lucknow: आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की टीम लखनऊ पहुंच चुकी है। यह टीम 22 और 23 जून, 2026 को विभिन्न कर्मचारी संगठनों और अधिकारियों के साथ बैठक करेगी। इन मुलाकातों का मकसद वेतन, भत्तों और पेंशन सिस्टम में सुधार के लिए सुझाव लेना है। टीम रविवार को शहर पहुंची और 24 जून को वापस जाएगी।
आयोग की इस आठ सदस्यीय टीम का नेतृत्व सदस्य सचिव पंकज जैन कर रहे हैं। वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को इस पूरी प्रक्रिया के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। बैठक के दौरान अलग-अलग अधिकारी अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे, जिसमें आलोक दीक्षित वित्तीय बोझ, वी.के. सिंह पेंशन लाभ, पुष्पराज वेतनमान और अनुराग गुप्ता भत्तों पर अपनी बात रखेंगे। आयोग इससे पहले दिल्ली, हैदराबाद, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में भी बैठकें कर चुका है।
कर्मचारी संगठनों की मांगों और आयोग की कार्यप्रणाली का विवरण नीचे दी गई टेबल में है:
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| प्रमुख मांगें | पुरानी पेंशन बहाली (OPS), फिटमेंट फैक्टर में 3 से 4 गुना बढ़ोतरी, न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते में सुधार |
| अन्य मुद्दे | आकस्मिक, अर्जित, मातृत्व, पितृत्व और चिकित्सा अवकाश, ग्रुप इंश्योरेंस, GPF और अनुकंपा नियुक्ति |
| आयोग का गठन | 3 नवंबर, 2025 को हुआ था |
| रिपोर्ट की समय सीमा | गठन से 18 महीने का समय मिला है |
| लागू होने की तिथि | सिफारिशें 1 जनवरी, 2026 से लागू होने की उम्मीद है |
| अगली बैठकें | भुवनेश्वर (6-7 जुलाई) और कोलकाता (9-10 जुलाई) |
जहां एक तरफ ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ डिप्लोमा इंजीनियर्स 23 जून को अपना पक्ष रखेगा, वहीं दूसरी तरफ कई बड़े संगठनों ने नाराजगी जताई है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और राजकीय शिक्षक संघ जैसे संगठनों का कहना है कि राज्य कर्मचारियों और शिक्षकों को इन वार्ताओं में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण बताया है और अब वे दिल्ली जाकर सीधे आयोग के अध्यक्ष से मिलेंगे। साथ ही, कुछ संगठनों ने आउटसोर्स और संविदा कर्मियों की स्थिति पर विचार करने की मांग की है।