IIT और IIM में लेक्चर देते हैं इस अखाड़े के साधु-संत, कोई डॉक्टर तो कोई लॉ एक्सपर्ट, तो कोई है पीएचडी

15 जनवरी 2019 को पहले शाही स्नान के साथ कुंभ मेला शुरू हो जाएगा, जो 4 मार्च तक चलेगा। दुनिया के इस सबसे बड़े धार्मिक आयोजन को यूनेस्को ने भी मान्यता दी है। इस मेले में आने वाले साधु और अखाड़े खासे आकर्षण का केंद्र होते हैं। इनमें से एक है निरंजनी अखाड़ा, जिसमें करीब 70 फीसदी साधु-संत ने हायर एजुकेशन हासिल की है। इनमें डॉक्टर, लॉ एक्सपर्ट, प्रोफेसर, संस्कृत के विद्वान और आचार्य शामिल हैं। संतों की शिक्षा तथा शैक्षणिक योग्याता के संबंध में जानकारी मिली है।

निरंजनी अखाड़े के डॉक्टर-लॉ एक्सपर्ट
इस अखाड़े के महेशानंद गिरि ज्योग्राफी के प्रोफेसर तो वहीं बालकानंद जी डॉक्टर और पूर्णानंद गिरि लॉ एक्सपर्ट और संस्कृत के विद्वान हैं। संत स्वामी आनंदगिरि नेट क्वालिफाइड हैं। वे आईआईटी खड़गपुर, आईआईएम शिलांग में लेक्चर दे चुके हैं। अभी बनारस से पीएचडी कर रहे हैं।

150 में से 100 से ज्यादा महामंडलेश्वर उच्चशिक्षित
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि कहते हैं कि निरंजनी अखाड़ा इलाहाबाद-हरिद्वार में पांच स्कूल-कॉलेज संचालित कर रहा है। हरिद्वार में एक संस्कृत कॉलेज भी है। इनका मैनेजमेंट और व्यवस्थाएं संत संभालते हैं, समय-समय पर छात्रों को पढ़ाई भी करवाते हैं।

904 वर्ष पूर्व गुजरात के मांडवी में हुई थी निरंजनी अखाड़े की स्थापना
अपनी किताब सनातन संस्कृति का महापर्व सिंहस्थ में सिद्धार्थ शंकर गौतम ने लिखा है कि निरंजनी अखाड़े की स्थापना वर्ष 904 में गुजरात के मांडवी में हुई थी, जबकि इतिहासकार जदुनाथ सरकार इसे वर्ष 1904 बताते हैं। प्रमाणों के मुताबिक स्थापना विक्रम संवत् 960 में हुई। सभी अखाड़ों में निरंजनी अखाड़ा सबसे फेमस है। इसमें सबसे ज्यादा क्वालिफाइड साधु-संत हैं, जो शैव परंपरा के मानने वाले हैं। जटा रखते हैं। इस अखाड़े के इष्टदेव कार्तिकेय हैं। जो देव सेनापति हैं। इसका इतिहास डूंगरपुर रियासत के राजगुरु मोहनानंद के समय से मिलता है। शालिग्राम श्रीवास्तव ने अपनी किताब प्रयाग प्रदीप में बताया है इनका स्थान दारागंज है।
इनपुट: DBC

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